कोरोना की दूसरी लहर में ये दिक्कत होती है सबसे ज्यादा ,जानिए कब आती है अस्पताल जाने की नौबत

कोरोना वायरस की तबाही ने पुरे भारत को हिलाकर रख दिया है मरीजों की बढ़ती तकलीफ के बीच अस्पतालों में आईसीयू बेड और ऑक्सीजन की कमी भी बड़ी चिंता का विषय है डबल म्युटेंट वेरिएंट में साँस से जुडी तकलीफ ज्यादा देखने को मिल रही है। 


ऑक्सीजन सेचुरेशन फेफड़े और तमाम अंगो तक जाने वाले खून के ओक्सिजेनेटेड हीमोग्लोबिन का लेवल है ये बॉडी फंक्शन को डंग से चलने में मदद करता है राइडिंग में इसका 94 से ज्यादा खतरे से बाहर होने का संकेत है। 


Spo2 लेवल 94 से 100 के बीच हमारे स्वस्थ्य होने का संकेत है जबकि 94 से नीचे जाते ही ये हाइपोक्सिमिया को ट्रिगर कर सकता है जिसमे कई तरह की परेशानियां होती है। 


यदि शरीर में ऑक्सीजन 95 से ऊपर है तो घबराने वाली बात नहीं है अगर ऑक्सीजन का लेवल 91 -94 के बीच है तो उसे लगातार मॉनिटर करने की जरूरत है लेकिन अगर ऑक्सीजन लेवल  1-2 घंटे तक लगातार 91 के नीचे जा जरा है तो आपको तुरंत मेडिकल सहायता की जरूरत है। 


कोरोना के कॉमन लक्षणों को लेकर सभी लोग जागरूक है लेकिन कई ऐसे छिपे हुए लक्षण भी है जो लोग नोटिस नहीं कर पते हैं होठों पर नीलापन और फेस का अचानक से रंग उड़ना ऐसे ही लक्षणों में गिने जाते है। 


भाप लेने से कोरोना को नष्ट और साँस में राहत पाई जा सकती है इसके लिए लोग पानी में तरह -तरह के तेल डालकर भाप लेते है इसके आलावा कुछ वायरल पोस्ट में लॉन्ग ,अजवाइन या कपूर को साँस में तकलीफ का बेजोड़ नुस्खा बताया जा रहा है। 



Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं मान्यताओं पर आधारित हैं. Brain Remind इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें. इस खबर से सबंधित सवालों के लिए कमेंट करके बताये और ऐसी खबरे पढ़ने के लिए हमें फॉलो करना ना भूलें - धन्यवाद

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